इस्लाम

सैय्यदा आइशा (रज़ि.) की उम्र

आम तौर पर माना जाता है कि पैग़म्बर मुहम्मद स.अ.व. के साथ निकाह के वक़्त उम्मुल मोमिनीन (मुसलमानों की माँ) सैय्यदा आइशा (रज़ि.) की उम्र 6 साल थी। ये निकाह पैग़म्बर मुहम्मद स.अ.व. की पहली पत्नी सैय्यदा खदीजा (रज़ि.) की मृत्यु के बाद मक्के में हुआ था। सैय्यदा आइशा (रज़ि.) विदाई इसके तीन साल बाद …

सैय्यदा आइशा (रज़ि.) की उम्र Read More »

इस्लाम छोड़ने की सज़ा !

हमारे कानूनविदों (फुक्हा) का मानना है कि स्वधर्म त्याग यानी इर्तेदाद की सज़ा मौत है। हम इस राय को ठीक नहीं मानते। इसका विश्लेषण करते हुए ग़ामिदी साहब लिखते हैं[1]: स्वधर्म त्याग की यह सज़ा एक हदीस को समझने में गलती से पैदा हुई है। यह हदीस ‘अब्दुल्लाह इब्न अब्बास (रज़ि.) ने रवायत की है और …

इस्लाम छोड़ने की सज़ा ! Read More »

अस्र की नमाज़ के बाद सजदा और इबादत

मुसलमानों में आमतौर पर यह माना जाता है कि अस्र की नमाज़ के बाद मग़रिब तक नमाज़ पढ़ना या सजदा करना मना है। यहाँ यह बात साफ़ कर लेनी चाहिए कि रसूलअल्लाह (स.व) की सुन्नत के मुताबिक जिन वक्तों में नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती वह सिर्फ सूरज के निकलने (सूर्योदय) और उसके डूबने (सूर्यास्त) …

अस्र की नमाज़ के बाद सजदा और इबादत Read More »

नज़र और मन्नत माँगना

काफी लोग मानते हैं कि नज़र और मन्नत माँगना इस्लाम में एक पसंद किया जाने वाला काम है। मिसाल के तौर पर अल्लाह से अहद (प्रण) करना कि मुराद पूरी होने पर हम एक तय संख्या में रोज़े (उपवास) रखेंगे या एक तय संख्या में नफ्ल (स्वैच्छिक) नमाज़ अदा करेंगे। यहाँ यह बात जान लेना …

नज़र और मन्नत माँगना Read More »

हदीस की व्याख्या

हदीसों की स्वतंत्र व्याख्या

हदीस की व्याख्या (तशरीह) में आम तरीका है कि हर हदीस को स्वतंत्र रूप से समझा जाता है भले ही खबर के अलग-अलग संस्करण हों जिनमें अलग बाते बयान हो रही हों। इसका नतीजा यह निकलता है कि वह पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पाती जिसके बारे में हुक्म दिया गया था और अधूरी जानकारी …

हदीसों की स्वतंत्र व्याख्या Read More »

हदीसें कुरआन जितनी ही प्रामाणिक हैं

हदीसें कुरआन जितनी ही प्रामाणिक हैं ?

कुछ विद्वान (आलिम) मानते हैं कि हदीसें कुरआन जितनी ही प्रामाणिक और विश्वसनीय (मुस्तनद और भरोसेमंद) हैं[1]। यह राय ठीक नहीं है। जहाँ कुरआन की प्रमाणिकता जाँचने की ज़रूरत नहीं है वही हदीस की सनद (उसे बयान करने वालो की श्रृंखला) और उसके मतन (मूलपाठ, जो बात उसमें बयान हुई है) दोनों ही को जाँचना …

हदीसें कुरआन जितनी ही प्रामाणिक हैं ? Read More »

कुरआन की व्याख्या

हदीसों से कुरआन की व्याख्या

कुछ विद्वानों का मानना है कि कुरआन की व्याख्या (तशरीह-तफसीर) हदीसों पर निर्भर है और कुरआन को हर हाल में सिर्फ हदीसों के ज़रिये ही समझा जाना चाहिए। हालांकि, कुरआन खुद मिज़ान और फुरक़ान की हैसियत रखता है और कुरआन का यह स्थान ज़ोर देता है कि बाकी हर चीज़ की व्याख्या कुरआन की रौशनी और उसके मार्गदर्शन में होनी …

हदीसों से कुरआन की व्याख्या Read More »

रसूलअल्लाह (स.व) का हर काम सुन्नत हैं ?

कुछ लोगों मानते हैं कि रसूलअल्लाह (स.व) द्वारा किया गया हर काम सुन्नत है। इस अवधारणा (तसव्वुर) का विश्लेषण करते हुए ग़ामिदी साहब लिखते हैं:[1] कुरआन में यह बात बिलकुल साफ़ है कि अल्लाह के पैगंबर उसका दीन लोगों तक पहुँचाने के लिए आये, उनके इस पैगंबर होने की क्षमता में (पैगंबर की हैसियत से) …

रसूलअल्लाह (स.व) का हर काम सुन्नत हैं ? Read More »

सुन्नत और हदीस का फ़र्क

सुन्नत और हदीस का फ़र्क

अकसर सुन्नत और हदीस दोनों शब्दों को पर्यायवाची या एक ही चीज़ समझा जाता है, लेकिन दोनों की प्रामाणिकता (सच्चाई) और विषय-वस्तु (मोज़ू) में बहुत अंतर है। रसूलअल्लाह (स.व) के कथन (क़ौल), कार्य (फेअल) और स्वीकृति एवं पुष्टि (इजाज़त और तस्दीक) की रिवायतों (लिखित परंपरा) या ख़बरों को इस्लामी परिभाषा में ‘हदीस’ कहा जाता है।  यह हदीसें इस्लाम के …

सुन्नत और हदीस का फ़र्क Read More »

कुरआन में संपूर्ण ज्ञान का होना

कुछ लोगों का मानना है कि कुरआन के अंदर मुकम्मल इल्म मौजूद है और हमारे किसी भी सवाल का जवाब कुरआन में मिल जायेगा, इस राय की पुष्टि के लिए यह आयत पेश की जाती है: مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ  ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ   [٦: ٣٨]  हमने इस किताब के बाहर कोई चीज़ नहीं छोड़ी …

कुरआन में संपूर्ण ज्ञान का होना Read More »