ईमानियात (मान्यताएं)

किस्मत और पूर्वनियति

कुछ मुसलमान मानते हैं कि भाग्य तो पहले से लिखा हुआ है। अगर ऐसा है तो फिर कुछ लोग उन कर्मों (अमाल) के लिए नरक में क्यों जायेंगे जो उनकी किस्मत में पहले से लिखे हुए थे ? इस बारे में तो वह कुछ नहीं कर सकते। इसके अलावा यह सवाल भी पैदा होता है कि …

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मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम

इस्लाम के सिवा बाक़ी तमाम मज़हबों के मानने वालों को ग़ैर-मुस्लिम कहा जाता है। यही शब्द/परिभाषा उन लोगों के लिए भी है जो किसी दीन या मज़हब को नहीं मानते। ये कोई अपमान का शब्द नहीं है, बल्कि सिर्फ इस वास्तविकता का इज़हार है कि वो इस्लाम के मानने वाले नहीं हैं। उन्हें आम तौर पर काफ़िर भी कह दिया जाता है, लेकिन हमने अपनी किताबों में …

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नबूव्वत का परिचय – भाग 1

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद: मुश्फ़िक़ सुल्तान إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَ‌اهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُ‌ونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورً‌ا ﴿١٦٣﴾ وَرُ‌سُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُ‌سُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّـهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا ﴿١٦٤﴾ رُّ‌سُلًا مُّبَشِّرِ‌ينَ وَمُنذِرِ‌ينَ لِئَلَّا …

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