पवित्र कुरआन

70 – सूरह अल-मआरिज

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है। बहुत जल्दी मचाई है एक जल्दी मचाने वाले ने, उस अज़ाब के लिए जो इन मुन्किरों पर आकर रहेगा, उसे कोई हटा न सकेगा। वह अल्लाह की तरफ से आएगा जो उरूज के ज़ीनो वाला है। (यह हर चीज़ को अपने पेमानो से …

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69 – सूरह अल हाक़्क़ह

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है। होनी शुदनी! क्या है होनी शुदनी! और तुम क्या जानो के क्या है वह होनी शुदनी ! (1-3) हो कर रहने वाली! क्या है वह हो कर रहने वाली! और तुम क्या जानो कि क्या है वह हो कर रहने वाली ! (1-3)   …

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68 – सूरह अल-क़लम

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है।   यह सूरह नून है। क़लम गवाही देता है और जो कुछ (लिखने वाले उससे) लिख रहे हैं।के अपने परवरदिगार की इनायत से तुम कोई दीवाने नहीं हो।और तुम्हारे लिए यक़ीनन वह सिला है जिस पर कभी ज़वाल न आएगा।और तुम बड़े आला अख़्लाक़ …

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67 – सूरह अल-मुल्क

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है। बहुत बुज़ुर्ग, बहुत फैज़-रसा है, वह (परवरदिगार) जिसके हाथ में आलम की बादशाही है और वह हर चीज़ पर कुदरत रखता है। (वही ) जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुमको आज़माए के तुममें से कौन बेहतर अमल करने वाला है। …

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कुरआन की व्याख्या

हदीसों से कुरआन की व्याख्या

कुछ विद्वानों का मानना है कि कुरआन की व्याख्या (तशरीह-तफसीर) हदीसों पर निर्भर है और कुरआन को हर हाल में सिर्फ हदीसों के ज़रिये ही समझा जाना चाहिए। हालांकि, कुरआन खुद मिज़ान और फुरक़ान की हैसियत रखता है और कुरआन का यह स्थान ज़ोर देता है कि बाकी हर चीज़ की व्याख्या कुरआन की रौशनी और उसके मार्गदर्शन में होनी …

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कुरआन में संपूर्ण ज्ञान का होना

कुछ लोगों का मानना है कि कुरआन के अंदर मुकम्मल इल्म मौजूद है और हमारे किसी भी सवाल का जवाब कुरआन में मिल जायेगा, इस राय की पुष्टि के लिए यह आयत पेश की जाती है: مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ  ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ   [٦: ٣٨]  हमने इस किताब के बाहर कोई चीज़ नहीं छोड़ी …

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कुरआन की कुछ आयात का अर्थ सिर्फ अल्लाह ही जानता है ?

आमतौर पर यह माना जाता है कि कुरआन की कुछ आयात ऐसी हैं जिनका मतलब सिर्फ अल्लाह जानता है और इंसान उनका मतलब नहीं समझ सकते, इन आयात को ‘मुताशाबिहात’ कहा जाता है। इस बात को स्पष्ट करना ज़रूरी है कि मुताशाबिहात असल में वह आयात हैं जिनमें उन चीज़ों का उल्लेख (ज़िक्र) हुआ है जो …

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कुरआन का सात अ'हरूफ पर उतारा जाना

कुछ हदीसें दावा करती है कि कुरआन सात अ'हरूफ पर नाज़िल किया गया है।  जैसे कि यह खबर:                            “ “अब्द अल-रहमान इब्न अब्द अल-कारी से रवायत है कि उमर इब्न अल-खत्ताब ने उनके सामने कहा: “मैंने हिशाम इब्न हाकीम इब्न हिज़ाम को सूरा फुरकान अलग तरह से पढ़ते हुए सुना और मुझे यह सूरा खुद रसूलअल्लाह …

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मुक़दमा – अल्-बयान (कुरआन का परिचय)

अपने मज़मून (विषय-वस्तु) के लिहाज़ से कुरआन एक रसूल की सरगुज़श्त-ए-इंज़ार[1] है, यानी अल्लाह के रसूल की दावत, उसके मुख्तलिफ मराहिल (विभिन्न चरण) और उसमें पेश आने वाले नतीजों का बयान है। मुहम्मद (स.व) के बारे में यह मालूम है कि आप नबी होने के साथ रसूल भी थे। अल्लाह जिन इंसानों को लोगों की हिदायत (मार्गदर्शन) के लिए …

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कुरआन में पाठभेद

एक धारणा यह भी है कि कुरआन में पाठभेद (Variant Readings) हैं। यानी कुरआन की एक ही आयत के अलग-अलग संस्करण मौजूद हैं। यह भिन्नता सिर्फ उच्चारण (तलफ्फुज़) में ही नहीं बल्कि शब्दों में भी हो सकती है, उदाहरण के तौर पर कहीं कोई शब्द घट-बढ़ जाना, एकवचन या बहुवचन[1] का फर्क हो जाना या …

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