इस्लाम

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक – जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद और टीका – मुश्फ़िक़ सुलतान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (कथन), फेअल (कार्य) और 'तक़रीर-व-तस्वीब'[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (उल्लेख परंपरा) को इस्लामी परिभाषा में 'हदीस' कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर 'अखबार–ए-आहाद'[2] के तौर पर हम तक पहुंची हैं। इनके बारे में यह बात तो स्पष्ट …

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The Hadith of Ghazwa-e-Hind- An analysis

Question The Prophet has said that two groups in my ummah (group of my followers) shall be successful. One which fights in Hind (India) and the other that accompanies Hadhrat Isa (Jesus) when he comes back. Can we say that the freedom fighters of Kashmir belong to the first of the two groups mentioned by …

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ग़ज़वा-ए-हिन्द की कमज़ोर और ग़लत रिवायात का जायज़ा

(Read the original article in Urdu: http://www.javedahmadghamidi.com/books/view/ghazwa-e-hind-ki-kamzor-aur-ghalat-riwayaat-ka-jaiza) लेखक: मुहम्मद फारूक खां अनुवाद: मुहम्मद असजद हमारे दीन की तालीमात (शिक्षाएँ) बिलकुल साफ़ और वाज़ेह हैं, क्योंकि उन की बुनियाद कुरआन मजीद और सहीह हदीसों[1] पर है। कुरआन मजीद के मामले में तो किसी शक (संदेह) की गुंजाइश नहीं है, लेकिन क्योंकि हदीसें एक इंसान से दूसरे इंसान …

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दाढ़ी की दीन में हैसियत

लेख़क: मुहम्मद असजद दाढ़ी की दीन में क्या हैसियत (स्थान) है इस पर बात शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी बातें हम ज़ेहन में रख कर चलेंगे। सबसे पहले यह की किसी भी चीज़ को दीन का दर्जा (श्रेणी) देने या हराम (निषिद्ध) करार कर देने का हक (अधिकार) सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल को …

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क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे?

लेखक: डॉ शहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद कुछ आलिम यह राय रखते हैं कि हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह जहाँ रह रहा हो वहां इस्लामी रियासत (राष्ट्र) कायम करे और इस्लामी शरीअत लागू करे। इसके लिए वह रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की मिसाल देते है और कहते हैं कि जिस तरह उन्होंने अरब …

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हलब जल रहा है – Aleppo is burning  

हलब जल रहा है हम जला रहे हैं … इस बात में कोई शक नहीं कि किसी भी मामले के पसमंज़र में बहुत सारे पहलू कारफर्मां (कारक) होतें हैं, लेकिन मुसलमान होने की हैसियत से हमारी यही ज़िम्मेदारी हैं के हम इस मामले में सबसे पहले अपना जायज़ा लें (समीक्षा करें), इस बात का जायज़ा लें …

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नबूव्वत का परिचय – भाग 1

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद: मुश्फ़िक़ सुल्तान إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَ‌اهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُ‌ونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورً‌ا ﴿١٦٣﴾ وَرُ‌سُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُ‌سُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّـهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا ﴿١٦٤﴾ رُّ‌سُلًا مُّبَشِّرِ‌ينَ وَمُنذِرِ‌ينَ لِئَلَّا …

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दीन और अक़ल

लेखक: जावेद अहमद गामिदी अनुवादक : मुश्फ़िक़ सुल्तान हमारे यहाँ लोग अक्सर कहते हैं कि दीन का अक़ल से क्या संबन्ध? यह तो बस मान लेने की चीज़ है। इस के लिए अली रज़ी अल्लाहो अनहु का यह कथन दलील के तौर पर पेश किया जाता है कि दीन के अहकाम (आदेश) अगर अक़ल पर …

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