सवाल-ओ-जवाब

सैय्यदा आइशा (रज़ि.) की उम्र

आम तौर पर माना जाता है कि पैग़म्बर मुहम्मद स.अ.व. के साथ निकाह के वक़्त उम्मुल मोमिनीन (मुसलमानों की माँ) सैय्यदा आइशा (रज़ि.) की उम्र 6 साल थी। ये निकाह पैग़म्बर मुहम्मद स.अ.व. की पहली पत्नी सैय्यदा खदीजा (रज़ि.) की मृत्यु के बाद मक्के में हुआ था। सैय्यदा आइशा (रज़ि.) विदाई इसके तीन साल बाद …

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क़ुरबानी के बदले दान या सदका देना

कुछ लोगों का मानना है कि ईद पर किसी भेड़-बकरी की बलि (क़ुरबानी) करने के बजाय उसके बराबर पैसा दान में दिया जा सकता है। यह धारणा (तसव्वुर) सही नहीं है, इसको ज़रा विस्तार में समझते हैं: हर इंसान जो अल्लाह पर यकीन रखता है, उसके लिए दो दायरों में रिश्ते वजूद में आते हैं। …

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क्या अल्लाह ने इस्माइल (स.व) की क़ुरबानी मांगी थी ?

आमतौर पर यह माना जाता है कि अल्लाह ने इब्राहिम (स.व) से उनके बेटे की क़ुरबानी मांगी थी। यह तो सही है कि क़ुरबानी से उन्हें बचा लिया गया पर सवाल यह है कि क़ुरबानी आखिर मांगी क्यों गयी थी ? मामले को समझा जाये तो असल में अल्लाह ने कभी इब्राहीम (स.व) को अपने …

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रसूलअल्लाह (स.व) का हर काम सुन्नत हैं ?

कुछ लोगों मानते हैं कि रसूलअल्लाह (स.व) द्वारा किया गया हर काम सुन्नत है। इस अवधारणा (तसव्वुर) का विश्लेषण करते हुए ग़ामिदी साहब लिखते हैं:[1] कुरआन में यह बात बिलकुल साफ़ है कि अल्लाह के पैगंबर उसका दीन लोगों तक पहुँचाने के लिए आये, उनके इस पैगंबर होने की क्षमता में (पैगंबर की हैसियत से) …

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क्या महिलाएं पुरुषों से हीन (कमतर) हैं ?

कुछ लोग मानते हैं कि मर्द औरतों से बेहतर हैं और इस के लिए वह निम्नलिखित आयत का हवाला देते हैं: الرِّجَالُ قَوَّامُونَ عَلَى النِّسَاءِ بِمَا فَضَّلَ اللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ وَبِمَا أَنفَقُوا مِنْ أَمْوَالِهِمْ [٤: ٣٤] मर्द औरतों के सरबराह (प्रमुख)बनाये गए हैं, इसलिए कि अल्लाह ने एक को दूसरे पर बड़ाई दी है, और इसलिए …

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क्या नरक में महिलाएं अधिक होंगी ?

निम्नलिखित हदीस को इस बात के समर्थन में पेश किया जाता है कि नरक में महिलाएं पुरुषों से अधिक संख्या में होंगी: अबू सईद ख़ुदरी रवायत करते हैं: “रसूलअल्लाह (स.व) ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-फ़ित्र के दिन नमाज़ के लिए निकले। वह महिलाओं के पास से गुज़रे तो उनसे फरमाया: ‘ऐ महिलाओं, दान (सदका) दो इसलिए कि …

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महरम के साथ सफ़र की शर्त

अधिकतर विद्वानों (आलिमों) की राय है कि महिलाएं अकेले सफ़र नहीं कर सकतीं। उनके साथ कोई महरम (कोई ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ शादी नहीं की जा सकती) होना ज़रूरी है। इसलिए उन्हें किसी यात्रा, जैसे की हज पर भी अकेले जाने की इजाज़त नहीं है। निम्नलिखित हदीसें इस राय का आधार (बुनियाद) हैं: अबू हुरैरा रसूलअल्लाह (स.व) …

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क्या औरतें मर्दों से कम अक्ल हैं ?

निम्नलिखित हदीस को आधार (बुनियाद) बनाकर कुछ लोग कहते हैं कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले बुद्धि और विवेक (अक्ल-औ-हिकमत) कम होता है:  अबू सईद ख़ुदरी से रवायत हैं: “रसूलअल्लाह (स.व) ईद-उल-फ़ित्र या ईद-उल-ज़ुहा के मौके पर नमाज़ के लिए जा रहे थे। वह जब कुछ औरतों के पास से गुज़रे तो फ़रमाया: ‘बावजूद नाकिसात …

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क्या गैर-मुसलमानों से सूद लिया जा सकता है ?

कुछ विद्वानों (आलिमों) की राय हैं कि गैर-मुसलमानों से सूद लिया जा सकता है। यहाँ यह समझ लेना चहिए कि इंसानों से सूद लेना हराम किया गया है, चाहे वह मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम क्योंकि यह एक अनैतिक अनुबंध (गैर-अखलाकी माएहदा) है। जो चीज़ें अनैतिक हैं वह मना हैं, चाहे मुसलमानों से संबंधित हों या गैर-मुस्लिमों …

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किसी नेक काम के लिए सूद लेना 

कुछ लोगों का मानना है कि सूद (ब्याज़) आधारित योजनाओं में पैसा लगाया जाना चाहिए ताकि कमाये गए सूद से जन-कल्याण परियोजनाओं (public welfare schemes) में निवेश (invest) किया जा सके और जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके। यहाँ यह बात साफ़ कर लेनी चाहिए कि सूद लेना इस्लाम में पूरी तरह मना है चाहे वह किसी …

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