ग़लतफहमियां

पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार

कुरआन ने कुछ खास परिस्थितियों (हालात) में पति को अधिकार दिया है कि वह पत्नी को शारीरिक दंड दे सकता है और यह मामला एक बड़ी बहस का मुद्दा बन चुका है। इस पूरे मामले को इसके सही स्वरूप में समझना ज़रूरी है। कुरआन कहता है: وَاللَّاتِي تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَاهْجُرُوهُنَّ فِي الْمَضَاجِعِ وَاضْرِبُوهُنَّ فَإِنْ …

पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार Read More »

क्या गैर-मुस्लिमों से दोस्ती नहीं की जा सकती ?

कुरआन की निम्नलिखित आयत की बुनियाद पर कुछ मुसलिम विद्वान (आलिम)[1] यह राय रखते हैं कि मुसलमानों को गैर-मुस्लिमों से मित्रता नहीं रखनी चाहिए, बल्कि उन्हें उनके लिए दुश्मनी और नफ़रत भरा रवैया रखना चाहिए: لَّا يَتَّخِذِ الْمُؤْمِنُونَ الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ [٣: ٢٨]  ईमान वाले अब मुसलमानों को छोड़कर इन काफिरों को अपना दोस्त ना बनायें। (3:28) …

क्या गैर-मुस्लिमों से दोस्ती नहीं की जा सकती ? Read More »

मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम

इस्लाम के सिवा बाक़ी तमाम मज़हबों के मानने वालों को ग़ैर-मुस्लिम कहा जाता है। यही शब्द/परिभाषा उन लोगों के लिए भी है जो किसी दीन या मज़हब को नहीं मानते। ये कोई अपमान का शब्द नहीं है, बल्कि सिर्फ इस वास्तविकता का इज़हार है कि वो इस्लाम के मानने वाले नहीं हैं। उन्हें आम तौर पर काफ़िर भी कह दिया जाता है, लेकिन हमने अपनी किताबों में …

मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम Read More »

Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of a democratic system of governance, the rest of the time it …

Is Democracy Compatible with Islam? Read More »

क्या सारे गैर-मुसलिम निंदनीय काफ़िर हैं ?

लेखक: शेहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद आमतौर पर यह माना जाता है कि सभी गैर-मुसलिम काफ़िर हैं जिनको कुरआन[1] में निंदा (मज़म्मत) और दंड के योग्य बताया गया है। यह धारणा सही नहीं है। एक व्यक्ति काफ़िर तब बनता है जब वह सच को पहचान ले और उस पर पूरी तरह आश्वस्त (कायल) हो और …

क्या सारे गैर-मुसलिम निंदनीय काफ़िर हैं ? Read More »

The Hadith of Ghazwa-e-Hind- An analysis

Question The Prophet has said that two groups in my ummah (group of my followers) shall be successful. One which fights in Hind (India) and the other that accompanies Hadhrat Isa (Jesus) when he comes back. Can we say that the freedom fighters of Kashmir belong to the first of the two groups mentioned by …

The Hadith of Ghazwa-e-Hind- An analysis Read More »

ग़ज़वा-ए-हिन्द की कमज़ोर और ग़लत रिवायात का जायज़ा

(Read the original article in Urdu: http://www.javedahmadghamidi.com/books/view/ghazwa-e-hind-ki-kamzor-aur-ghalat-riwayaat-ka-jaiza) लेखक: मुहम्मद फारूक खां अनुवाद: मुहम्मद असजद हमारे दीन की तालीमात (शिक्षाएँ) बिलकुल साफ़ और वाज़ेह हैं, क्योंकि उन की बुनियाद कुरआन मजीद और सहीह हदीसों[1] पर है। कुरआन मजीद के मामले में तो किसी शक (संदेह) की गुंजाइश नहीं है, लेकिन क्योंकि हदीसें एक इंसान से दूसरे इंसान …

ग़ज़वा-ए-हिन्द की कमज़ोर और ग़लत रिवायात का जायज़ा Read More »

दाढ़ी की दीन में हैसियत

लेख़क: मुहम्मद असजद दाढ़ी की दीन में क्या हैसियत (स्थान) है इस पर बात शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी बातें हम ज़ेहन में रख कर चलेंगे। सबसे पहले यह की किसी भी चीज़ को दीन का दर्जा (श्रेणी) देने या हराम (निषिद्ध) करार कर देने का हक (अधिकार) सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल को …

दाढ़ी की दीन में हैसियत Read More »

क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे?

लेखक: डॉ शहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद कुछ आलिम यह राय रखते हैं कि हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह जहाँ रह रहा हो वहां इस्लामी रियासत (राष्ट्र) कायम करे और इस्लामी शरीअत लागू करे। इसके लिए वह रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की मिसाल देते है और कहते हैं कि जिस तरह उन्होंने अरब …

क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे? Read More »