Misconceptions

How Islam abolished slavery

Author: Javed Ahmad Ghamidi Translation: Dr. Shehzad Saleem وَالَّذِينَ يَبْتَغُونَ الْكِتَابَ مِمَّا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ فَكَاتِبُوهُمْ إِنْ عَلِمْتُمْ فِيهِمْ خَيْرًا وَآتُوهُمْ مِنْ مَالِ اللَّهِ الَّذِي آتَاكُمْ –٢٤ :٣٣ And if any of your slaves ask for Mukātabat, accept it give it to them if you know any good in them and [for this] give them out of the …

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तस्वीर और आकृतियां

ऐसा माना जाता है कि इस्लाम में जीवन रखने वाली चीज़ों की तस्वीर या आकृति बनाना हराम है।[1] बदकिस्मती से इस मुद्दे पर इस्लाम के रुख को समझने में बड़ी ग़लतफ़हमी हुई है। यह बात बिलकुल सही नहीं है कि इस्लाम में तस्वीरें और चित्र पूरी तरह से हराम हैं। इस्लाम ने सिर्फ उन तस्वीरों पर …

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गाने और संगीत के बारे में

आम तौर पर यह माना जाता है कि ललित कलाओं (fine arts) को लेकर इस्लाम का रवैया बहुत उत्साहजनक या बहुत अच्छा नहीं है। इस्लाम इंसान की फितरत में मौजूद सौन्दर्य-बोध (जमालियात और खूबसूरती के एहसास) को ना ही ज़्यादा महत्व (अहमियत) देता है और ना उसे विकसित होने का मौका देता है, उदाहरण के तौर …

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क्या नरक में महिलाएं अधिक होंगी ?

निम्नलिखित हदीस को इस बात के समर्थन में पेश किया जाता है कि नरक में महिलाएं पुरुषों से अधिक संख्या में होंगी: अबू सईद ख़ुदरी रवायत करते हैं: “रसूलअल्लाह (स.व) ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-फ़ित्र के दिन नमाज़ के लिए निकले। वह महिलाओं के पास से गुज़रे तो उनसे फरमाया: ‘ऐ महिलाओं, दान (सदका) दो इसलिए कि …

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महरम के साथ सफ़र की शर्त

अधिकतर विद्वानों (आलिमों) की राय है कि महिलाएं अकेले सफ़र नहीं कर सकतीं। उनके साथ कोई महरम (कोई ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ शादी नहीं की जा सकती) होना ज़रूरी है। इसलिए उन्हें किसी यात्रा, जैसे की हज पर भी अकेले जाने की इजाज़त नहीं है। निम्नलिखित हदीसें इस राय का आधार (बुनियाद) हैं: अबू हुरैरा रसूलअल्लाह (स.व) …

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क्या औरतें मर्दों से कम अक्ल हैं ?

निम्नलिखित हदीस को आधार (बुनियाद) बनाकर कुछ लोग कहते हैं कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले बुद्धि और विवेक (अक्ल-औ-हिकमत) कम होता है:  अबू सईद ख़ुदरी से रवायत हैं: “रसूलअल्लाह (स.व) ईद-उल-फ़ित्र या ईद-उल-ज़ुहा के मौके पर नमाज़ के लिए जा रहे थे। वह जब कुछ औरतों के पास से गुज़रे तो फ़रमाया: ‘बावजूद नाकिसात …

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गैर-मुस्लिमों को ज़कात

कुछ लोगों का मानना है कि ज़कात किसी गैर-मुस्लिम को नहीं दी जा सकती। यह राय ठीक नहीं है। कुरआन की निम्नलिखित आयत बताती है कि ज़कात कहाँ-कहाँ खर्च की जा सकती है: إِنَّمَا الصَّدَقَاتُ لِلْفُقَرَاءِ وَالْمَسَاكِينِ وَالْعَامِلِينَ عَلَيْهَا وَالْمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمْ وَفِي الرِّقَابِ وَالْغَارِمِينَ وَفِي سَبِيلِ اللَّهِ وَابْنِ السَّبِيلِ  فَرِيضَةً مِّنَ اللَّهِ  وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ …

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Javed Ahmad Ghamidi: A brief Introduction to his life and works

Author: Ammar Baksh A short, humble, witty old man has been creating tremors in the world of Islam that a few have noticed and many do not want to. He has explored almost every old school and has set out to restructure the age-old narratives of Islam. Javed Ahmad Ghamidi is a force to be …

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An Interview of Javed Ahmad Ghamidi with an Indian News Channel

This writing is based on the transcript of the interview of Javed Ahmad Ghamidi with Lemon News, India in 2013. You can watch the complete programme here. Host: Islam is a well established religion, and is meant to exist forever. However, with time and rapid changes in global politics, the understanding and image of Islam have …

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इसलाम और रियासत (एक जवाबी बयानिया) – The Counter Narrative

जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: आक़िब ख़ान इस समय जो हालात कुछ इंतिहापसंद तहरीकों ने अपनी कार्रवाइयों से इसलाम और मुसलमानों के लिए पूरी दुनिया में पैदा कर दी है, ये उसी विचारधारा का बुरा नतीजा है जो हमारे मज़हबी मदरसों में पढ़ा और पढ़ाया जाता है, और जिसका प्रचार इस्लामी तहरीकें और मज़हबी सियासी संगठन …

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