इस्लाम

इस्लाम में गुलाम और लौंडी  

लेखक:  जावेद अहमद ग़ामदी संकलन: शेहज़ाद सलीम अनुवाद : मुहम्मद असजद इस्लाम के बारे में कई अन्य गलत धारणाओं (तसव्वुर) में से एक धारणा यह भी है कि इस्लाम गुलामी को मंजूरी देता है और अपने मानने वालों को इजाज़त देता है कि वह युद्ध के कैदियों, खासकर महिलाओं को दासी बनाएं और उनसे विवाहेतर (extra-marital) संबंध रखें। …

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तालिबान के त्रुटिपूर्ण तर्क और वास्तविक इस्लाम

दुनिया जिन स्वयंनियुक्त ईश्वरीय योद्धाओं को तालिबान के नाम से जानती है, पिछले दस वर्षों में वो अनगिनत निर्दोष लोगों की हत्या कर चुके हैं।उनका आग्रह है कि ये सब वो परमेश्वर के लिए और परमेश्वर के आदेश के पालनमें कर रहे हैं। मलाला युसुफजई पर कायरतापूर्ण हमले के पश्चात भी उनहों ने अपने इसी …

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मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम

इस्लाम के सिवा बाक़ी तमाम मज़हबों के मानने वालों को ग़ैर-मुस्लिम कहा जाता है। यही शब्द/परिभाषा उन लोगों के लिए भी है जो किसी दीन या मज़हब को नहीं मानते। ये कोई अपमान का शब्द नहीं है, बल्कि सिर्फ इस वास्तविकता का इज़हार है कि वो इस्लाम के मानने वाले नहीं हैं। उन्हें आम तौर पर काफ़िर भी कह दिया जाता है, लेकिन हमने अपनी किताबों में …

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Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of a democratic system of governance, the rest of the time it …

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हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक – जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद और टीका – मुश्फ़िक़ सुलतान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (कथन), फेअल (कार्य) और 'तक़रीर-व-तस्वीब'[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (उल्लेख परंपरा) को इस्लामी परिभाषा में 'हदीस' कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर 'अखबार–ए-आहाद'[2] के तौर पर हम तक पहुंची हैं। इनके बारे में यह बात तो स्पष्ट …

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नबूव्वत का परिचय – भाग 1

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद: मुश्फ़िक़ सुल्तान إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَ‌اهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُ‌ونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورً‌ا ﴿١٦٣﴾ وَرُ‌سُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُ‌سُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّـهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا ﴿١٦٤﴾ رُّ‌سُلًا مُّبَشِّرِ‌ينَ وَمُنذِرِ‌ينَ لِئَلَّا …

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दीन और अक़ल

लेखक: जावेद अहमद गामिदी अनुवादक : मुश्फ़िक़ सुल्तान हमारे यहाँ लोग अक्सर कहते हैं कि दीन का अक़ल से क्या संबन्ध? यह तो बस मान लेने की चीज़ है। इस के लिए अली रज़ी अल्लाहो अनहु का यह कथन दलील के तौर पर पेश किया जाता है कि दीन के अहकाम (आदेश) अगर अक़ल पर …

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