कुरआन

69 – सूरह अल हाक़्क़ह

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है। होनी शुदनी! क्या है होनी शुदनी! और तुम क्या जानो के क्या है वह होनी शुदनी ! (1-3) हो कर रहने वाली! क्या है वह हो कर रहने वाली! और तुम क्या जानो कि क्या है वह हो कर रहने वाली ! (1-3)   …

69 – सूरह अल हाक़्क़ह Read More »

68 – सूरह अल-क़लम

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है।   यह सूरह नून है। क़लम गवाही देता है और जो कुछ (लिखने वाले उससे) लिख रहे हैं।के अपने परवरदिगार की इनायत से तुम कोई दीवाने नहीं हो।और तुम्हारे लिए यक़ीनन वह सिला है जिस पर कभी ज़वाल न आएगा।और तुम बड़े आला अख़्लाक़ …

68 – सूरह अल-क़लम Read More »

67 – सूरह अल-मुल्क

अल्लाह के नाम से जो सरासर रहमत है, जिसकी शफ़क़त अबदी है। बहुत बुज़ुर्ग, बहुत फैज़-रसा है, वह (परवरदिगार) जिसके हाथ में आलम की बादशाही है और वह हर चीज़ पर कुदरत रखता है। (वही ) जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुमको आज़माए के तुममें से कौन बेहतर अमल करने वाला है। …

67 – सूरह अल-मुल्क Read More »

क़ुरआन की विषय-वस्तु   

लेखक: जावेद अहमद ग़ामदी अनुवाद: आकिब खान क़ुरआन के बारे में यह बात उस का एक आम पढ़ने वाला भी बहुत आसानी के साथ जान सकता है कि उसकी विषय-वस्तु (मोज़ू) सिर्फ़ वह  हक़ीक़तें हैं जिनको मानने और जिनसे पैदा होने वाले तक़ाज़ों को पूरा करने पर इंसान की हमेशा की कामयाबी का दारोमदार है। …

क़ुरआन की विषय-वस्तु    Read More »

तालिबान के त्रुटिपूर्ण तर्क और वास्तविक इस्लाम

दुनिया जिन स्वयंनियुक्त ईश्वरीय योद्धाओं को तालिबान के नाम से जानती है, पिछले दस वर्षों में वो अनगिनत निर्दोष लोगों की हत्या कर चुके हैं।उनका आग्रह है कि ये सब वो परमेश्वर के लिए और परमेश्वर के आदेश के पालनमें कर रहे हैं। मलाला युसुफजई पर कायरतापूर्ण हमले के पश्चात भी उनहों ने अपने इसी …

तालिबान के त्रुटिपूर्ण तर्क और वास्तविक इस्लाम Read More »

मुसलमानों का ज़वाल ( पतन ) – कारण और हल

मुसलमान लगभग हज़ार वर्षों तक एक विश्व शक्ति रहे हैं। इल्म और हिकमत में, राजनीतिक कौशल और समृद्धि, दौलत और यश में कोई भी क़ौम उनके साथ बराबरी नहीं कर पाती थी। इस अवधि में पूरे विश्व पर उनकी हुकूमत थी। यह हुकूमत उन्हें अल्लाह के द्वारा दी गई थी और अल्लाह ने ही उनसे …

मुसलमानों का ज़वाल ( पतन ) – कारण और हल Read More »

Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of a democratic system of governance, the rest of the time it …

Is Democracy Compatible with Islam? Read More »

क्या सारे गैर-मुसलिम निंदनीय काफ़िर हैं ?

लेखक: शेहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद आमतौर पर यह माना जाता है कि सभी गैर-मुसलिम काफ़िर हैं जिनको कुरआन[1] में निंदा (मज़म्मत) और दंड के योग्य बताया गया है। यह धारणा सही नहीं है। एक व्यक्ति काफ़िर तब बनता है जब वह सच को पहचान ले और उस पर पूरी तरह आश्वस्त (कायल) हो और …

क्या सारे गैर-मुसलिम निंदनीय काफ़िर हैं ? Read More »

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक – जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद और टीका – मुश्फ़िक़ सुलतान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (कथन), फेअल (कार्य) और 'तक़रीर-व-तस्वीब'[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (उल्लेख परंपरा) को इस्लामी परिभाषा में 'हदीस' कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर 'अखबार–ए-आहाद'[2] के तौर पर हम तक पहुंची हैं। इनके बारे में यह बात तो स्पष्ट …

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त) Read More »

क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे?

लेखक: डॉ शहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद कुछ आलिम यह राय रखते हैं कि हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह जहाँ रह रहा हो वहां इस्लामी रियासत (राष्ट्र) कायम करे और इस्लामी शरीअत लागू करे। इसके लिए वह रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की मिसाल देते है और कहते हैं कि जिस तरह उन्होंने अरब …

क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे? Read More »