कुरआन

क़ुरआन की विषय-वस्तु   

लेखक: जावेद अहमद ग़ामदी अनुवाद: आकिब खान क़ुरआन के बारे में यह बात उस का एक आम पढ़ने वाला भी बहुत आसानी के साथ जान सकता है कि उसकी विषय-वस्तु (मोज़ू) सिर्फ़ वह  हक़ीक़तें हैं जिनको मानने और जिनसे पैदा होने वाले तक़ाज़ों को पूरा करने पर इंसान की हमेशा की कामयाबी का दारोमदार है। …

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तालिबान के त्रुटिपूर्ण तर्क और वास्तविक इस्लाम

दुनिया जिन स्वयंनियुक्त ईश्वरीय योद्धाओं को तालिबान के नाम से जानती है, पिछले दस वर्षों में वो अनगिनत निर्दोष लोगों की हत्या कर चुके हैं।उनका आग्रह है कि ये सब वो परमेश्वर के लिए और परमेश्वर के आदेश के पालनमें कर रहे हैं। मलाला युसुफजई पर कायरतापूर्ण हमले के पश्चात भी उनहों ने अपने इसी …

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मुसलमानों का ज़वाल ( पतन ) – कारण और हल

मुसलमान लगभग हज़ार वर्षों तक एक विश्व शक्ति रहे हैं। इल्म और हिकमत में, राजनीतिक कौशल और समृद्धि, दौलत और यश में कोई भी क़ौम उनके साथ बराबरी नहीं कर पाती थी। इस अवधि में पूरे विश्व पर उनकी हुकूमत थी। यह हुकूमत उन्हें अल्लाह के द्वारा दी गई थी और अल्लाह ने ही उनसे …

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Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of a democratic system of governance, the rest of the time it …

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क्या सारे गैर-मुसलिम निंदनीय काफ़िर हैं ?

लेखक: शेहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद आमतौर पर यह माना जाता है कि सभी गैर-मुसलिम काफ़िर हैं जिनको कुरआन[1] में निंदा (मज़म्मत) और दंड के योग्य बताया गया है। यह धारणा सही नहीं है। एक व्यक्ति काफ़िर तब बनता है जब वह सच को पहचान ले और उस पर पूरी तरह आश्वस्त (कायल) हो और …

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हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक – जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद और टीका – मुश्फ़िक़ सुलतान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (कथन), फेअल (कार्य) और 'तक़रीर-व-तस्वीब'[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (उल्लेख परंपरा) को इस्लामी परिभाषा में 'हदीस' कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर 'अखबार–ए-आहाद'[2] के तौर पर हम तक पहुंची हैं। इनके बारे में यह बात तो स्पष्ट …

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क्या हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह इस्लामी रियासत कायम करे?

लेखक: डॉ शहज़ाद सलीम अनुवाद: मुहम्मद असजद कुछ आलिम यह राय रखते हैं कि हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वह जहाँ रह रहा हो वहां इस्लामी रियासत (राष्ट्र) कायम करे और इस्लामी शरीअत लागू करे। इसके लिए वह रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की मिसाल देते है और कहते हैं कि जिस तरह उन्होंने अरब …

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नबूव्वत का परिचय – भाग 1

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद: मुश्फ़िक़ सुल्तान إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَ‌اهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُ‌ونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورً‌ا ﴿١٦٣﴾ وَرُ‌سُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُ‌سُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّـهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا ﴿١٦٤﴾ رُّ‌سُلًا مُّبَشِّرِ‌ينَ وَمُنذِرِ‌ينَ لِئَلَّا …

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दीन और अक़ल

लेखक: जावेद अहमद गामिदी अनुवादक : मुश्फ़िक़ सुल्तान हमारे यहाँ लोग अक्सर कहते हैं कि दीन का अक़ल से क्या संबन्ध? यह तो बस मान लेने की चीज़ है। इस के लिए अली रज़ी अल्लाहो अनहु का यह कथन दलील के तौर पर पेश किया जाता है कि दीन के अहकाम (आदेश) अगर अक़ल पर …

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