25
MAR
2017

हलाला

यह कहा जा सकता है कि हलाला[1] की अवधारणा (तसव्वुर) इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक्हा) का सबसे शर्मनाक मुद्दा है। शरीअत के अनुसार, अगर पति अपनी पत्नी को तीसरी बार तलाक़ दे देता है तो वह दोनों फिर से शादी नहीं कर सकते सिवाय इसके कि पत्नी किसी और से शादी कर ले और वहां से भी उसे तलाक़
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25
MAR
2017

Principles to Discern the Coherence(Nazm) in Quran

Author: Amin Ahsan Islahi To describe the principles of how to discern nazm is more important than to enumerate the arguments in order to substantiate its existence in the Holy Qur’ān. A person does not feel compelled to deny nazm in the Holy Qur’ān because he does not app
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25
FEB
2017

यतीम पोते की विरासत

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: मुहम्मद असजद पोते की विरासत में दादा और दादा की विरासत में पोते का कोई हिस्सा साफ तौर पर तो कुरआन में बयान नहीं हुआ, लेकिन أولاد (औलाद) और آبا (आबा) के शब्दों में लुग़त (शब्दकोश) और उर्फ़ (इस्तेमाल), दोनों के एतबार से दादा और पोता भी शामिल हो जाते ह
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08
FEB
2017

Downfall of the Muslims

Muslims remained a great power in this world for almost a thousand years. No nation was able to compete with them with regard to knowledge and wisdom, political acumen and affluence. They reigned over the whole world during this period. This kingdom was given to them by God and it was
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07
FEB
2017

Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of
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31
JAN
2017

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक – जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवाद और टीका – मुश्फ़िक़ सुलतान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (कथन), फेअल (कार्य) और 'तक़रीर-व-तस्वीब'[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (उल्लेख परंपरा) को इस्लामी परिभाषा में 'हदीस' कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर &#
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