निम्नलिखित हदीस को इस बात के समर्थन में पेश किया जाता है कि नरक में महिलाएं पुरुषों से अधिक संख्या में होंगी:

अबू सईद ख़ुदरी रवायत करते हैं: “रसूलअल्लाह (स.व) ईद-उल-अज़हा या ईद-उल-फ़ित्र के दिन नमाज़ के लिए निकले। वह महिलाओं के पास से गुज़रे तो उनसे फरमाया: ‘ऐ महिलाओं, दान (सदका) दो इसलिए कि मुझे दिखाया गया है कि तुममें से ज्यादातर नरक में हैं।’ उन्होंने कहा: ‘अल्लाह के पैगंबर, ऐसा क्यों ?’ रसूलअल्लाह (स.व) ने फरमाया: ‘यह इसलिए कि तुम एक दूसरे को बहुत कोसती हो और अपने पतियों को अकृतज्ञता (नाशुक्री) दिखाती हो।’”​​[1]

इस हदीस से यह नतीजा निकालना गलत है कि जहन्नम में औरतें मर्दों के मुकाबले ज़्यादा होंगी, यह इस हदीस से गलत अनुमान लगा लिया गया है और उसकी वजह है उन हदीसों की शैली और अंदाज़ को ठीक से ना समझना जिनमें नबियों के स्वप्न (ख्वाब) बयान हुए हैं। अल्लाह के नबियों के स्वप्न अल्लाह से संपर्क (communication) का ज़रिया होते हैं, इन सपनों में जो कुछ उन्हें दिखाया जाता है वह उनकी और लोगों की शिक्षा और हिदायत के लिए होता है। हालांकि, उसूल यह नहीं है कि उन सपनों में जो दिखाया गया बिलकुल वैसा ही असल ज़िन्दगी में होना है बल्कि इन सपनों में सच्चाई को प्रतीकात्मक रूप[2] (symbolic representation) में  दिखाया जाता है। आसान लफ़्ज़ों में कहें तो इस तरह के ख्वाब ताबीर के मोहताज होते हैं।

प्रतीकात्मक रूप में कोई बात पहुँचाना एक असरदार ज़रिया है, लगता यह है कि सच्चाई छुपी हुई है लेकिन जब उस पर कोई रुक कर गौर करता है तो उसके लिए वह खुल कर सामने आती है। प्रतीकात्मक रूप में चीज़ों को समझाना और अधिक प्रभावी हो जाता है। मिसाल के लिए यूसुफ (स.व) के उस सपने को लेते हैं जिसका ज़िक्र कुरआन में हुआ है। उसमें युसूफ (स.व) ने देखा कि सूरज, चाँद और ग्यारह सितारे उन्हें सजदा कर रहे हैं। इसका असल मतलब कुरआन में ही सूरेह युसूफ के आख़िर में बताया गया है , यहाँ  सूरज, चाँद और ग्यारह सितारे कुछ लोगों को दर्शा रहे थे। इस तरह की और मिसाले कुरआन में मिल जायेगीं।

जिन हदीसों में महिलाओं को ज़्यादातर नरक में दिखाए जाने की बात कही गयी है उन हदीसों को भी इसी उसूल पर समझा जायेगा। इन हदीसों में नरक के अन्दर महिलाओं की आबादी का बयान नहीं हो रहा क्योंकि यह ख्वाब का शाब्दिक अर्थ (लफ्ज़ी मायना) हो जायेगा, बल्कि इसके उलट, इन हदीसों में उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि वह कुछ ऐसे काम ज़्यादा करती हैं जो उन्हें नरक की ओर ले जाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं तो उन्हें चाहिए कि ऐसे कर्मों से खुद को बचाएं। दूसरे शब्दों में महिलाओं को उनके कुछ गलत कामों  के लिए प्रतीकात्मक रूप से खबरदार किया गया है।
 

– शेहज़ाद सलीम
  अनुवाद: मुहम्मद असजद​

 


[1]. सहीह बुख़ारी, भाग.1, 116, (न. 298)।​
[2]. अलामत के तौर पर।